मुनि संघ को जैन पंचायत कमेटी ने किये श्रीं फल भेंट अशोक नगर पधारने का किया आग्रहशिवपुरी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनिश्री निरापद सागर जी महाराज मुनिश्री नीरज सागर जी महाराज मुनिश्री निरामद सागर जी महाराज ससंघ दस पिछी को जैन समाज अध्यक्ष राकेश कासंल, महामंत्री राकेश अमरोद, कोषाध्यक्ष सुनील अखाई, मंत्री विजय धुर्रा, कबूल चन्द्र कोरवास, बिट्टू जैन, रिषभ कुमार कोरवास सहित अन्य भक्तों ने जिले की वामोर पहुंच कर मुनि संघ को श्री फल भेंट किए एवं अशोक नगर पधारने का निवेदन किया।
मुनिश्री निरापद सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन को सहज बनाने की आवश्यकता है आज लोग पूरी तरह बनावटी जीवन जी रहे हैं बनावटी पन के कारण वास्तविक जीवन से व्यक्ति बहुत दूर हो गया है हमें वास्तविका को सामने रखकर अपने जीवन को उन्नत वनना है जीवन को सहज बनाने के लिए और भी जिन जिन आयामों की आवश्यकता महसूस हो उनको अपने रोज मर्रा की दिन चर्या में लाना है सहजता के साथ सरलता भी आना चाहिए आप संत समागम करते रहते हैं हर जगह यही बात आयेंगी आप लोग कहते हैं यही यही तो सुनते रहते हैं सुनने से बढ़कर अव दैन दैनिक दिनचर्या में शामिल करके ही अपने भावों को निर्मल बनाकर आप आगे बढ़ते चले जायेंगे।
धर्म हमें सनमार्ग दिखाता है : मुनि श्री
इसके पहले मुनिश्री नीरज सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म हमें सनमार्ग दिखाता है चलना आपको ही पड़ेगा आज तक कोई विना चले मंजिल पर नहीं पहुंच धर्म के दो स्वरूप कहें गये है श्रमण धर्म और श्रावक धर्म आप अब देख सकते हैं कि श्रावक धर्म को हम किस तरह से निभा रहे हैं ये और कोई नहीं हमें ही देखना है श्रावक धर्म में क्या क्या आता है दान पूजा शील और उपवास फिर दान के चार भेद कहें गये इसमें भी कुछ लोग ज्ञान दान को महत्व देते हैं कुछ करुणा दान को कुछ पात्रदान को महत्व देते हैं दान तो सभी श्रेष्ठ कहे गए हैं।
इसके पहले मुनिश्री नीरज सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म हमें सनमार्ग दिखाता है चलना आपको ही पड़ेगा आज तक कोई विना चले मंजिल पर नहीं पहुंच धर्म के दो स्वरूप कहें गये है श्रमण धर्म और श्रावक धर्म आप अब देख सकते हैं कि श्रावक धर्म को हम किस तरह से निभा रहे हैं ये और कोई नहीं हमें ही देखना है श्रावक धर्म में क्या क्या आता है दान पूजा शील और उपवास फिर दान के चार भेद कहें गये इसमें भी कुछ लोग ज्ञान दान को महत्व देते हैं कुछ करुणा दान को कुछ पात्रदान को महत्व देते हैं दान तो सभी श्रेष्ठ कहे गए हैं।
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